Skip to main content

राम राम

 





भजन करो उस रब का जो दाता हैं कुल सब का

Clapping hands sign
कबीर, अक्षर पुरुष एक पेड़ है निरंजन वाकी डार ।
Palm tree
त्रिदेवा शाखा भए पात रूप संसार ।।
Fallen leaf
कबीर एकै साधै, सब सधे सब साधे सब जाय । माली सींचे मूल को, फलै फूलै अघाय ।।



राम





Comments

Popular posts from this blog

  प्रेरक कहानी: महिमा राम राम की     एक आदमी बर्फ बनाने वली कम्पनी में काम करता था। एक दिन कारखाना बन्द होने से पहले, अकेला फ्रिज करने वाले कमरे का चक्कर लगाने गया तो गलती से दरवाजा बंद हो गया। और वह अंदर बर्फ वाले हिस्से में फंस गया, छुट्टी का वक़्त था और सब काम करने वाले लोग घर जा रहे थे। किसी ने भी अधिक ध्यान नहीं दिया की कोई अंदर फंस गया है। वह समझ गया की दो-तीन घंटे बाद उसका शरीर बर्फ बन जाएगा अब जब मौत सामने नजर आने लगी तो , भगवान को सच्चे मन से याद करने लगा। अपने कर्मों की क्षमा मांगने लगा और भगवान से कहा कि प्रह्लाद को तुमने अग्नि से बचाया , अहिल्या को पत्थर से नारी बनाया , शबरी के जुठे बेर खाकर उसे स्वर्ग में स्थान दिया। प्रभु अगर मैंने जिंदगी में कोई एक काम भी मानवता व धर्म का किया है तो मुझे यहाँ से बाहर निकालो। मेरे बीवी बच्चे मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे। मैं इकलौता ही अपने घर में कमाने वाला हूं। मैं पुरे जीवन आपके इस उपकार को याद रखूंगा और इतना कहते कहते उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे। कुछ समय ही गुज़रा था कि अचानक फ़्रीजर रूम में खट खट की आवाज हुई। दरव...

परदोष दर्शन भी एक बड़ा पाप है

परदोष दर्शन भी एक बड़ा पाप है एक गाँव में मन्दिर में एक संन्यासी रहते थे। उस मंदिर के ठीक सामने ही एक वेश्या का मकान था। वेश्या के यहाँ रात−दिन लोग आते−जाते रहते थे। यह देखकर संन्यासी मन ही मन कुड़ता रहता। एक दिन वह अपने को नहीं रोक सका और उस वेश्या को बुलावा भेजा। उसके आते ही फटकारते हुए कहा—‟तुझे शर्म नहीं आती पापिन, दिन रात पाप करती रहती है। मरने पर तेरी क्या गति होगी?” संन्यासी की बात सुनकर वेश्या को बड़ा दुःख हुआ। वह मन ही मन पश्चाताप करती भगवान से प्रार्थना करती अपने पाप कर्मों के लिए क्षमा याचना करती। बेचारी कुछ जानती नहीं थी। बेबस उसे पेट के लिए वेश्यावृत्ति करनी पड़ती किन्तु दिन रात पश्चाताप और ईश्वर से क्षमा याचना करती रहती। उस संन्यासी ने यह हिसाब लगाने के लिए कि उसके यहाँ कितने लोग आते हैं एक−एक पत्थर गिनकर रखने शुरू कर दिये। जब कोई आता एक पत्थर उठाकर रख देता। इस प्रकार पत्थरों का बड़ा भारी ढेर लग गया तो संन्यासी ने एक दिन फिर उस वेश्या को बुलाया और कहा “पापिन? देख तेरे पापों का ढेर? यमराज के यहाँ तेरी क्या गति होगी, अब तो पाप छोड़।” पत्थरों का ढेर देखकर अब तो वेश्या काँप ग...
पारिजात के पौधे का महत्व और चमत्कार पारिजात के पेड़ को हारसिंगार का पेड़ भी कहा जाता है। इसमें बहुत ही सुंदर और सुगंधित फूल लगते हैं। यह सारे भारत में पैदा होता है। इसे संस्कृत में पारिजात , शेफालिका कहते हैं।   1. कहते हैं कि पारिजात वृक्ष की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान हुई थी जिसे इंद्र ने अपनी वाटिका में रोप दिया था। हरिवंशपुराण में इस वृक्ष और फूलों का विस्तार से वर्णन मिलता है। 2. पौराणिक मान्यता अनुसार पारिजात के वृक्ष को स्वर्ग से लाकर धरती पर लगाया गया था। नरकासुर के वध के पश्चात एक बार श्रीकृष्ण स्वर्ग गए और वहां इन्द्र ने उन्हें पारिजात का पुष्प भेंट किया। वह पुष्प श्रीकृष्ण ने देवी रुक्मिणी को दे दिया। देवी सत्यभामा को देवलोक से देवमाता अदिति ने चिरयौवन का आशीर्वाद दिया था। तभी नारदजी आए और सत्यभामा को पारिजात पुष्प के बारे में बताया कि उस पुष्प के प्रभाव से देवी रुक्मिणी भी चिरयौवन हो गई हैं। यह जान सत्यभामा क्रोधित हो गईं और श्रीकृष्ण से पारिजात वृक्ष लेने की जिद्द करने लगी। 3. पारिजात के फूलों को खासतौर पर लक्ष्मी पूजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन केवल उन्ही...