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handy Muhavare

 * ध्यान में धैय होता है, ज्ञान में ज्ञै होता है.-धैय माने लक्ष्य, ज्ञै माने जानने योग्य. दुनियां में हूं, दूनिया का तलबगार नहीं हूं, बाजार से गुजरा हूं पर खरीदार नहीं हूं. चाह गई चिंता मिटी , मनुआ बेपरवाह, जाको कछु नहीं चाहिए, वे साहन के साह धन की शुद्धि दान से, देह की शुद्धि स्नान से   पावस देखि रहीम मन ,  कोइल साधे मौन ,  अब दादुर बक्‍ता भए ,  हमको पूछत कौन.   * आओ, आओ वैशाखनंदन. !! किसी को संस्कृत में गधा कहना। *   नेकी नौ कोस ,  बदी सौ कोस * पट्ठों की जान गई ,  पहलवान का दांव ठहरा .   *    पड़ोसी के घर में बरसेगा तो बौछार यहाँ भी आयेगी। पड़ोसी के घर बरसेगा, तो क्या बौछार यहां न आवेगी. *  पत्ता खटका ,  बंदा सटका.      डरपोक लोगों के लिए. पत्ता खड़कने की आवाज सुन कर ही सरक लेते हैं. *  पराई आसा ,  नित उपवासा * पराई पत्तल का भात मीठा।  दूसरे कि थाली में खाना ज्यादा नजर आता है।  *    पराए धन पर लक्ष्मी नारायण।    दूसरों का धन बांट कर अपने को बड़ा दानी सिद्ध ...
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